बर्थडे स्‍पेशल: 43 के हुए सूफी कलाकार राहत फ़तेह अली खान

कहते है कला के लिए सरहदे मायने नही रखती,इंसानी सरहदों को पार कर ये कैसे लोगो के दिलो और रुहो तक पहुंच जाती है,इसका अंदाजा ना तो दो मुल्को को बांटने वाली सियासत लगा पाती है और ना उसके सियासतदान ! इन पक्तियों का इशारा एक ऐसे कलाकार की तरफ है जिसका जन्म,तालीम ,तो पाकिस्तान में हुई ,लेकिन जब उन्होंने हिदुस्तान को 'लगन लगी तुमसे मन की लगन; सुनाया तो मानो हिंदुस्तान को सच में इनकी आवाज़ की लगन लग गयी,
हम बात कर रहे है 'राहत फ़तेह अली खान ' की एक पाकिस्तानी प्रसिद्ध क़व्वाली गीतकार है और इनकी आवाज़ से इनकी पहचान पूरी दुनिया मे है
सूफी गीतकार राहत साहब का जन्म 9 दिसम्बर 1973 को पाकिस्तान में हुआ। उनके परिवार में कव्वाली गाने की परंपरा पीढी-दर-पीढी चली आ रही है। राहत के पूरे घर में ही संगीत का माहौल था। उनके वालिद फर्रुख फतेह अली खान साहेब को भी संगीत का शौक था। राहत ने संगीत की शिक्षा अपने तायाजी नुसरत फतेह अली खान से ली।राहत फ़तेह अली खान ने अपने करियर की पहली सोलो ग़ज़ल की परफॉरमेंस जिसके बोल थे 'मुख तेरा सोह्णेया शराब नालो चंगा है' से इंग्लैंड के बिर्मिंघम पैलेस से की, उस समय इनकी उम्र लगभग 12 साल की थी ,पार्श्वगायक राहत साहब ने बॉलीवुड में शुरआत सन 2003 में पूजा भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म पाप से की,उसके बाद से ही उनकी किस्मत का सितारा हिंदुस्तान में बुलंद है
आइये एक नज़र डालते हैं बॉलीवुड में राहत साहेब के कुछ गीतों पर
कलयुग : जिया धड़क धड़क
ओमकारा : नैना ठग लेंगे
ॐ शांति ॐ : जग सुना सुना लागे
नमस्ते लन्दन : मै जहाँ रहूँ
आजा नचले : ओ रे पिया
लव आज कल : आज दिन चढ़या
माय नाम इज़ खान : सज़दा
दबंग : तेरे मस्त मस्त दो नैन
सुल्तान : जग घूम्या

राहत फ़तेह अली खान ने अपने गीतों से लोगों के दिलों में एक खास जगह बना रखी है इसके साथ ही उन्होंने उन ऊंचाइयों को छुआ जो एक कलाकार का सपना होता है। राहत ने हॉलीवुड की फिल्मों के लिये भी काम किया है, 2014 नोबल पीस प्राइज कॉन्सर्ट में प्रस्तुति करने वाले ये पहले पाकिस्तानी नागरिक है, जिन्हें आमंत्रित किया गया। इसके साथ ही इन्हें कई अवार्ड्स से भी सराहा गया 'मिर्ची म्यूजिक अवार्ड्स' 'यूके एशियन अवार्ड्स' 'स्क्रीन अवार्ड्स' आदि।

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