संसद के शीतकालीन सत्र में सबसे ज्यादा हुआ हंगामा, काम हुआ सबसे कम

एक महीने तक चला संसद का शीतकालीन सत्र पूरी तरह से इस बार नोटबंदी की भेंट चढ़ गया, बीते 15 सालों में ऐसा पहली बार हुआ जब इस सत्र में सबसे ज्‍यादा हंगामा और सबसे कम काम हुआ. पीआरएस यानी लेजिस्‍लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक उत्‍पादकता के लिहाज से यदि बात की जाए तो लोकसभा के पास कामकाज के लिए 111 घंटे उपलब्‍ध थे लेकिन उसमें से कुल 19 घंटे ही काम हुआ और 92 घंटे बर्बाद हुए.
इसी तरह बात अगर राज्‍यसभा की करें तो राज्यसभा में 108 घंटे कामकाज के लिए निश्चित थे लेकिन केवल 22 घंटे काम हुआ और 86 घंटे बर्बाद हुए. यानी कि काम के लिहाज से लोकसभा और राज्‍यसभा में क्रमश: 15.75 प्रतिशत और राज्‍यसभा में महज 20.61 प्रतिशत काम हुआ.

प्रश्‍नकाल में लोकसभा में 11 प्रतिशत सवालों के जवाब दिए गए तो राज्‍यसभा में महज 0.6 प्रतिशत सवालों का जवाब दिया गया. कुल मिलाकर कहे तो लोकसभा ने काम के लिए निर्धारित एक घंटे के बदले पांच घंटे बर्बाद हुए वहीं राज्‍यसभा में एक घंटे के बदले चार घंटे का समय बर्बाद हुआ.

पेश हुए बिलों का खाका

लोकसभा में कुल 10 बिल पेश किए गए राज्‍यसभा में दिव्‍यांग अधिकारों से संबंधित बिल पेश किया गया. कुल मिलाकर यही बिल दोनों सदनों से पास होने में कामयाब हो पाया. इसके अलावा तीन अन्‍य बिल लोकसभा में पास हुए

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