नोटबंदी:भारत सरकार वीभत्स और अनैतिक कदम:फोर्ब्स

भारत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार, काले धन और आतंकवाद से निजात पाने के लिए उठाए गए नोटबंदी के कदम से कुछ हासिल नहीं हो पाएगा.
यह हमारा कहना नही बल्कि ये कहना हैं विश्वप्रसिद्ध पत्रिका 'फोर्ब्स' के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ स्टीव फोर्ब्स का. उन्होंने अपने संपादकीय यानी एडिटोरियल में लिखा है कि ग्रह के आबाद होने के वक्त से ही इंसानी फितरत नहीं बदली है. गलत काम करने वाले कोई न कोई रास्ता निकाल लेते हैं. सिर्फ करेंसी बदल देने की वजह से आतंकवादी अपनी बुरी हरकतें बंद नहीं कर देंगे, और धन का डिजिटाइज़ेशन होने में काफी वक्त लगने वाला है, वह भी उस स्थिति में, जब फ्री मार्केट की अनुमति दे दी जाएगी.
स्टीव फोर्ब्स के मुताबिक टैक्स चोरी से बचने का सबसे आसान उपाय एकसमान टैक्स दर, या कम से कम एक सरल और कम दर वाली टैक्स प्रणाली लागू करना होता है, जिसके बाद टैक्स चोरी करना ही व्यर्थ लगने लगे. स्टीव के मुताबिक कानूनन व्यापार करना आसान कर देंगे, तो ज़्यादातर लोग सही व्यापार करना शुरु कर देगे.

स्टीव फोर्ब्स का कहना है कि भारत इस समय नकदी के खिलाफ सरकारों के दिमाग में चढ़ी सनक का सबसे चरम उदाहरण है. बहुत-से देश बड़ी रकम के नोटों को बंद करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, और वही तर्क दे रहे हैं, जो भारत सरकार ने दिए हैं, लेकिन इसे समझने में कोई चूक नहीं होनी चाहिए कि इसका असली मकसद क्या है - आपकी निजता पर हमला करना और आपकी ज़िन्दगी पर सरकार का ज़्यादा से ज़्यादा नियंत्रण करना हैं
स्टीव फोर्ब्स लिखते है कि, भारत सरकार का यह घोर कृत्य अनैतिक है, क्योंकि मुद्रा वह वस्तु है, जो लोगों द्वारा बनाई गई वस्तुओं का चुनाव करती है. मुद्रा बिल्कुल वैसा ही वादा होती है, जैसा कोई सिनेमा में शामिल टिकट होती है, जो आपको सीट मिलने की गारंटी देती है. इस तरह के संसाधन सरकारें नहीं, लोग खुद पैदा करते हैं. जो भारत ने किया है, वह लोगों की संपत्ति की बहुत बड़े पैमाने पर चोरी करने के समान है, जो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार द्वारा किए गए होने की वजह से ज़्यादा चौंकाती है. ऐसा कुछ वेनेज़ुएला जैसे देश में होता, तो शायद इतनी हैरानी नहीं होती. और इससे भी कोई हैरानी नहीं होती कि सरकार इस सच्चाई को छिपा रही है कि इस एक कदम से एक ही झटके में दसियों अरब डॉलर का नुकसान होने जा रहा है.

अब भारत को ग्लोबल पॉवरहाउस बनने के लिए जो काम निश्चित रूप से करना चाहिए, वह है इन्कम तथा बिज़नेस टैक्स की दरों को घटा दे, और समूचे टैक्स ढांचे का सरलीकरण करे, विकिपीडिया से मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दे Forbes.com प्रति महीने 18 लाख लोगों को तक पहुँचता है।फोर्ब्स इन्कॉर्पोरेट, एक निजी स्वामित्व वाली प्रकाशन एवं मीडिया कंपनी है। जिसका प्रमुख प्रकाशन एक द्वि-साप्ताहिक पत्रिका फोर्ब्स है, जिसकी खपत (संचलन) 900,000 से अधिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *