किसान कर्ज माफी मामला : वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान, केन्द्र नहीं करेगा किसानों का कर्ज माफ

यूपी में किसानों से किए चुनावी वादे को पूरा करने का दबाव नई योगी सरकार के साथ-साथ अब केंद्र सरकार पर भी बढ़ता जा रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से किसानों का कर्ज माफ किए जाने की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार अगर किसानों के कर्ज माफ करती हैं तो उन्हें खुद इसका खर्च उठाना पड़ेगा. अरुण जेटली ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती कि एक राज्य के किसानों को कर्ज को पूरी तरह से माफ कर दें और दूसरे राज्यों को नहीं.

राज्यसभा में जेटली ने कहा कि, 'यह मुद्दा कई राज्यों में भी उठ रहा है. केंद्र सरकार की देश में खेती के लिए अपनी नीतियां है. हम ब्याज में सब्सिडी और दूसरी तरह की मदद करते आए हैं. ये योजनाएं आगे जारी रहेंगी. अगर किसी राज्य सरकार के पास पैसे हैं और वह कर्ज माफ करना चाहती है तो ऐसा कर सकती है.'

यहां गौर करने वाली बात ये है कि देश के वित्त मंत्री का ये बयान केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के उस बयान के ठीक विपरीत है जिसमें उन्होंने यूपी के किसानों का कर्ज माफ करने की बात कही थी. कृषि मंत्री ने कहा था कि कर्ज माफी के पैसे केंद्र सरकार ही देगी. आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि योगी कैबिनेट की पहली बैठक में किसानों का कर्ज माफ कर देने पर फैसला लिया जाएगा. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र था.

वहीं रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस.एस. मूंदड़ा ने भी कहा है कि इससे कर्ज लेने और देने वाले के बीच अनुशासन बिगड़ता है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह रिजर्व बैंक का रुख नहीं है. सरकार की तरफ से भी इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है.

मूंदड़ा ने यह जरूर कहा कि आरबीआई पारंपरिक रूप से किसान कर्ज माफी के खिलाफ रहा है. उन्होंने कहा, ज्यादा जरूरी यह देखना है कि कर्ज माफी की जरूरत है या नहीं. अगर है तो उसका तरीका क्या होना चाहिए. इससे पहले देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने भी किसान कर्ज माफ किए जाने पर आपत्ति जताई थी.

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