समाजवादी पेंशन योजना की सुप्रीम कोर्ट ने की सराहना

देश की सबसे बड़ी अदालत ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार द्वारा दी जाने वाली समाजवादी पेंशन योजना की तारीफ की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अखिलेश सरकार की ये पॉलिसी बेहद सुंदर है. इसी के साथ इस योजना को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. इस याचिका में कहा गया था कि समाजवादी पेंशन योजना में 25 फ़ीसदी का आरक्षण अल्पसंख्यकों को दिया गया है जो कि असंवैधानिक फैसला है. याचिकाकर्ता ने कहा था कि धर्म के आधार पर सरकारी योजनाओं में आरक्षण नहीं दिया जा सकता. समाजवादी पेंशन योजना के तहत 500 रुपये हर महीने दिया जाता है.

हिंदू फ्रंट फोर जस्टिस की ओर से याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने पहले ही आदेश दिया था कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती. लेकिन अखिलेश सरकार ने 2014 में समाजवादी पेंशन योजना लागू की, जिसके अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों को 500 रुपये की पेंशन बांटी जानी थी. इस योजना में राज्य सरकार ने 25 फीसदी आरक्षण अल्पसंख्यकों को, 45 फीसदी सामान्य और दूसरे पिछड़े वर्गों को और 30 फीसदी  अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए तय किया.

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में दलील दी कि धर्म के आधार पर कोई आरक्षण नहीं दिया जा सकता और मुस्लिम वर्ग और अल्पसंख्यकों को अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में पहले से ही आरक्षण मिल रहा है, इसलिए अल्पसंख्यकों को दिए जाने वाले 25 फीसदी आरक्षण के फैसले को तुरंत ही रद्द किया जाना चाहिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *