3600 करोड़ रु की लागत से बनने वाले शिवाजी स्मारक का पीएम मोदी ने शिलान्यास किया

मुंबई में अरब सागर में 3600 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक की नींव कल रख दी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने होवरक्राफ्ट के जरिए समुद्र में जाकर छत्रपति शिवाजी महाराज के मेमोरियल के लिए जलपूजन किया. ये स्मारक राजभवन से 1.5 किलोमीटर दूर बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुनिया के सबसे ऊंचे स्मारक को बनाने के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया. शिव स्मारक की मुख्य विशेषताओं में मराठा शासक की 192 मीटर ऊंची प्रतिमा होगी. इस स्मारक को अरब सागर में 32 एकड़ चट्टान पर बनाया जा रहा है. फडणवीस ने कहा कि इसको देखने एक बार में 10 हजार लोग आ सकते हैं. इस स्मारक में थिएटर, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट भी होगा. शिवाजी की मूर्ति को डिजाइन करने की जिम्मेदारी मशहूर शिल्पकार और पद्मभूषण से सम्मानित कलाकार राम सुतार को सौंपी गई है.
भूमि पूजन समारोह में कई केन्द्रीय मंत्रियों के अलावा शिवाजी के वंशजों को भी बुलाया गया. मराठा समाज के मूक मोर्चों को मिल रहे विशाल जनसमर्थन को देखते हुए इसे मराठा समाज को मनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
इस मौके पर शिवसेना पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं दिल्ली में पुरातत्व विभाग से एक ही गुज़ारिश करूंगा कि शिवाजी महाराज के सारे किलों का रखरखाव करें. बाद में प्रधानमंत्री ने भी कहा, "छत्रपति शिवाजी महाराज ने जो किले बनाए, हम उनका सही रखरखाव करें और दुनियाभर को उस बारे में बताएं. यूनिवर्सिटीज को बताएं कि यहां एडवेंचर टूरिज्म कराएं. क्यों न किलों के टूरिज्म शुरू कराएं? आज मेरे लिए अत्यंत आनंद का पर्व है. मैं महाराष्ट्र की जनता का आभारी हूं कि इस स्मारक के भूमि पूजन का मुझे सौभाग्य मिला है. जो संकल्पना महाराष्ट्र और फडणवीस सरकार ने की है, यह पूरी होकर रहेगी, ऐसी मेरी आशा है.''
पीएम ने कहा, ''ताजमहल देखकर लगता है कि जाना चाहिए. हर युग में आइकॉनिक चीजों का निर्माण हुआ है. वह उस देश की पहचान बना हुआ है. दुर्भाग्य है कि हम ताजमहल के बाहर नहीं निकल पाए. इस देश के हर कोने में विश्व को आकर्षित करने के अनेक स्थान हैं. अगर भारत का विश्व के सामने सही तरीके से प्रस्तुतीकरण हो तो भारत में दुनिया को आकर्षित करने की ताकत है. दुनिया में तेजी से टूरिज्म बढ़ रहा है.''

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