महाराष्ट्र में पत्रकारों को मिला ‘कानूनी संरक्षण’, ग़ैर जमानती मामला होगा पत्रकारों पर हमला

मीडिया पर हो रहे लगातार हमलों को देखते हुए महाराष्ट्र विधानसभा ने शुक्रवार को पत्रकारों और मीडिया पर हमले रोकने से संबंधित एक विधेयक पारित कर दिया. इस नए कानून के बाद महाराष्ट्र में पत्रकारों और मीडिया हाउस पर हमला पूरी तरह से अब ग़ैरजमानती अपराध होगा. पत्रकार संरक्षण कानून को सहमति मिलने के बाद पत्रकारों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सम्मानित भी किया.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में 'महाराष्ट्र मीडियापर्सन्स एंड मीडिया इंस्टीट्यूशन्स (प्रीवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डेमेज ऑर लॉस ऑफ प्रॉपर्टी) अधिनियम, 2017' निचले सदन में पेश किया. सदन में विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में इसे बिना चर्चा किए ही पारित कर दिया गया.

विधेयक मीडिया कर्मी के तौर पर अपने कर्तव्य का निर्वहन करते पत्रकारों के खिलाफ हिंसा को रोकता है और राज्य में मीडिया में काम करने वाले या मीडिया संस्थानों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकता है. विधेयक के अनुसार तीन साल तक की सजा तथा 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

आपको बता दें कि सरकारी आंकड़ो के अनुसार महाराष्ट्र पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक राज्य बना हुआ है. वरिष्‍ठ पत्रकार एसएम देशमुख के अनुसार महाराष्ट्र राज्य में हर 4 दिन में 1 पत्रकार पर हमला हो रहा है. इसके साथ बीते साल 84 पत्रकारों पर तो इस साल के शुरुआती 3 महीनों यानी जनवरी, फरवरी और मार्च में 16 पत्रकारों पर हमले हुए हैं.

नया कानून बनने के बाद इन पत्रकारों को मिलेगा संरक्षण

-प्रिंट और टीवी में काम कर रहे पत्रकारों के अलावा ऑनलाइन प्लेटफार्म में काम कर रहे पत्रकारों को भी संरक्षण मिलेगा
-पेशेवर पत्रकारों के साथ ही फ्रीलांसरों और ठेके पर कार्यरत पत्रकारों को भी संरक्षण मिलेगा
-पत्रकारों पर हमला करने वालों को और पत्रकारिता की आड़ में अनुचित काम करने वालों को 3 साल तक की सज़ा मिलेगी या 50 हजार का जुर्माना होगा.
- इसके अलावा हमलावर को पीड़ित के इलाज और मीडिया हाउस के नुकसान का मुआवजा देना होगा, इसका भी प्रावधान इसमें रखा गया है.

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