दंगल की असल हेरोइन ‘गीता फोगाट’, महिलाओं के लिए मिसाल

फिल्म 'दंगल' आने के बाद एक बार फिर 'गीता फोगाट' का नाम लोगों की ज़ुबान पर छाया हुआ है। हरियाणा और पूरे देश में महिलाओं के लिए आदर्श बन चुकी इस महिला पहलवान ने अपना पूरा बचपन अखाड़े में गुज़ारा है। जिस समय हरियाणा के छोटे से गांव में लड़कियों की छोटी उम्र मे शादी कर दी जाती थी, उसी समय महावीर फोगाट अपनी बेटियों को पहलवानी सिखा कर देश के हिस्से में स्वर्ण पदक लाने की तैयारी कर रहे थे। समाज के विरुद्ध जाकर स्त्रोतों की कमी के बावजूद महावीर सिंह ने चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी बेटियों को लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटने दिया। अपने पिता के विश्वास और दृढ़ता के कारण ही गीता 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में फ्रीस्टाइल कुश्ती में  स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, यही नहीं गीता ओलंपिक्स में पहलवानी क्वालीफाई करने वाली पहली महिला हैं। भारत का नाम विश्व में ऊंचाईयों  पर पहुंचाने वाली इस महिला की जितनी सराहना की जाये उतनी कम है।
आइये जानते हैं, इन दिनों लोगों के दिलों दिमाग पर छाई गीता फोगाट से जुड़ी कुछ खास बातें :

1. 28 साल की हो चुकी गीता का जन्म 15 दिसम्बर 1988 को हरियाणा में हुआ था।
2 . हरियाणा में भिवानी ज़िले का एक छोटा सा गांव है, 'बिलाली' जहाँ पर गीता का पूरा परिवार रहता है और गीता ने अपने करियर की शुरूआत भी वहीं से की।
3 . गीता एक हिन्दू जाट परिवार से हैं, फोगाट परिवार के संघर्षों को 'दंगल' फिल्म में बखूबी दर्शाया  गया है।
4 . इस महिला पहलवान के पिता 'महावीर सिंह फोगाट' ने ही कोच बनकर गीता को पहलवानी का पाठ पढ़ाया और हमेशा प्रोत्साहित किया।
5 . पिता महावीर सिंह फोगाट वरिष्ठ ओलंपिक कोच  हैं और खुद भी पहलवानी कर चुके हैं जिन्हें द्रोणाचार्य अवॉर्ड से भी नवाज़ा जा चुका है।
6 . गीता की बहन बबिता कुमारी ने भी पूरे विश्व में अपना और भारत का नाम पहलवानी में गर्व से ऊंचा किया है। बबिता ने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर, 2012 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रोंज़ और 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मैडल जीता है।
7 . गीता की सभी बहनें पहलवानी करती हैं, बबिता, विनेश, प्रियंका, ऋतु और संगीता ने नेशनल और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में अपना पैर जमाया है। प्रियंका और विनेश उनके चाचा की बेटियां हैं जिनका लालन-पालन महावीर ने ही किया है।
8 . लोगों के लिए मिसाल कायम कर चुकी गीता फोगाट को इंटरनेशनल मेडल के लिए कुछ समय तक जूझना पड़ा लेकिन 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी ही धरती पर गोल्ड का ख़िताब अपने नाम कर देशवासियों को गौरवान्वित कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *