अम्‍मा को पसंद नहीं आए सवाल, तो करण थापर को किया नजरबंद

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को उनके समर्थक 'अम्मा' कहकर पुकारते हैं, इस से उनकी लोकप्रियता दिखती है, मगर पार्टी में नेताओं और अधिकारियों के बीच वह बेहद सख्त प्रशासक के रूप में जानी जाती रहीं। वह कितनी मजूबत और असाधारण थी, इसका अंदाजा आप उनके किस्‍से सुना कर लगा सकते है। उनकी एक ऐसी छवि थी, जिनके सामने किसी का टिक पाना मुश्किल था। अम्‍मा को 'ना' सुनने की जैसे आदत ही नहीं थी और जब वह 'यू डोन्ट नो' (तुम नहीं जानते) कहती तो वहां अपने आप बातचीत का अंत हो जाता था।
ऐसा ही एक वाक़या है, जब बीबीसी वर्ल्ड के एक प्रोग्राम 'HARDtalk India' के लिए पत्रकार करण थापर जयललिता का इंटरव्यू लेने पहुंचे। इस इंटरव्‍यू की काफी चर्चा हुई क्योंकि करण के कुछ सवाल जयललिता को पसंद नहीं आए थे। जयललिता को सवालों से इतना गुस्‍सा आ गया कि अंत में वह माइक पटक कर चली गई, लेकिन अंत तक उन्‍होने हर सवाल का जवाब दिया।

उस वक्‍त वरिष्ठ पत्रकार परवेज़ आलम, बीबीसी के इस कार्यक्रम के प्रोड्यूसर थे और लंदन में रहते थे। उन्होंने इस इंटरव्यू को याद करते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है, कि चेन्नई में हुए जयललिता के इंटरव्‍यू के बाद करण थापर को कमरे से जाने नहीं दिया गया और नज़रबंद कर लिया गया।
परवेज़ फेसबुक पोस्‍ट में लिखतें है, कि लंदन में दिन चढ़ रहा था तब करण थापर का फोन आया, और करण ने धीमी आवाज़ में कहा कि चेन्नई में मुश्किल खड़ी हो गई है क्योंकि जयललिता इस इंटरव्यू से बहुत ज्यादा नाराज़ हैं। परवेज़ ने अपने पोस्‍टर में वो बातचीत बताई है, जहां से तनाव शुरू हुआ था। आइए जाने दोनों की बातचीत -
कर : (टोकते हुए) आप स्टेटमेंट पढ़ रही हैं,
जय : (टोकते हुए) मैं पढ़ नहीं रही हूं, मैं आपको देखकर बात कर रही हूं, आप कैमरे में देख सकते हैं।
कर : लेकिन मैं कह रहा हूं..
जय : मैं आपको देख रही हूं और बात कर रही हूं, मैं पढ़ नहीं रही हूं
कर : मैं आपसे जुड़ी एक बात पूछना चाहता हूं, लोग कहते हैं..
जय : (टोकते हुए) आपके सामन भी नोट्स रखे हैं। क्या इसका मतलब यह हुआ कि आप भी पढ़ रहे हैं।
कर : मेरे सामने सवाल रखे हैं।
जय : ठीक है तो मेरे सामने भी नोट्स हैं और मुझे इन्हें पढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।
कर : चीफ मिनिस्टर..
जय : मैं पढ़ नहीं रही हूं, मैं आपकी आंखों में आंख डालकर बात कर रही हूं। मैं सबके साथ ऐसा ही करती हूं।
इंटरव्यू खत्म होने के बाद करण को कुछ मौजूद पुलिस अधिकारी जाने नहीं दे रहे थे, करण को लगा कि उन्हें जयललिता के दफ्तर में नज़रबंद कर लिया गया है। दरअसल, जयल‍लिता का कार्यालय चाहता था कि पत्रकार करण यह इंटरव्यू फिर से रिकॉर्ड करें क्योंकि मुख्‍यमंत्री इस बातचीत और इसमें पूछे गए सवालों से खुश नहीं है। करण ने पुलिस अधिकारी से कहा मुझे लंदन बात करनी होगी, इसलिए उन्होंने मुझे फोन किया।
एक बार फिर इंटरव्‍यू के सवाल पर मेरा जवाब 'ना' ही था, मगर मैने एक बार फिर भी अपने बॉस और टीम से बातचीत की तो उनका जवाब भी ना ही था। परवेज़ पोस्‍ट में बताते है, कि कुछ तनावपूर्ण घंटों के बाद करण और उनकी टीम को वहां से जाने दिया गया।
दरअसल मामला ये था, कि इंटरव्यू के दौरन पत्रकार करण थापर ने मुख्‍यमंत्री जयललिता से चुनावी मैदान में जीत हासिल करने के अनुमान के बारे में पूछा लिया था, इस सवाल के जवाब में जयललिता ने कहा, कि वो ज्योतिषी नहीं हैं, इंतज़ार करें। मगर करण थापर ने वहीं सवाल एक बार फिर पूछ लिया तो जयललिता ने जवाल दिया, कि आप भी यहीं आस-पास होंगे, इंतज़ार कीजिए। इसके बाद जब करण थापर ने इंटरव्‍यू को समाप्‍त करते हुए कहा, कि आपसे बातचीत करना प्रसन्नता भरा अनुभव रहा तो जया ने जवाब दिया कि मुझे ये इंटरव्यू देकर बिलकुल अच्छा नहीं लगा। इसके बाद जयललिता ने माइक निकल कर टेबल पर पटक दिया।

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