चुनावी माहौल में चर्चित पशु ‘गधे’ पर कुमार विश्वास ने पढ़ी कविता, देखें वीडियो

चुनाव प्रचार के दौरान बड़े से बड़े नेता का एक-दूसरे के खिलाफ निशाना साधना आम बात है, मगर अपने भाषण में भाषा और शब्‍दों की सीमा ही भूल जाना हमें बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देता है. सवाल है कि नेता जनता के लिए चुनाव प्रचार करते हैं या‍ फिर ए‍‍क-दूसरे पर हमला बोलने के लिए?

मौजूदा दौर में देश के पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, उसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से लेकर सांसद त‍क चुनाव प्रचार के लिए एक दिन में ही कई जनसभाअोॆ को संबोधित कर रहे हैं. इसी दौरान बड़े नेताओं ने खुद पीएम मोदी अपने भाषण में गद्दार, गधा और आदि अपशब्‍द इस्‍तेमाल किए.

अभी हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रायबरेली में हुई एक रैली में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से अपील करते हुए कहा था कि 'हम सदी के महानायक से गुजारिश करते हैं कि वे गुजरात के गधों का प्रचार करना बंद करें.' उन्‍होंने आगे कहा कि 'अगर गधों का प्रचार होने लगेगा तो कैसे चलेगा. गुजरात के लोग तो वहां के गधों का भी प्रचार करवा रहे हैं. गधे का भी कहीं प्रचार कराया जाता है.'

इसके बाद पीएम मोदी ने भी अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए इसका जवाब दिया, पीएम नरेंद्र मोदी ने बहराइच में अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आप मोदी और बीजेपी पर हमला करो तो समझ सकता हूं, लेकिन अब आप गधे पर हमला कर रहे हो? गधे से भी डर लगने लगा है क्या? पीएम ने कहा मैं गर्व से गधे से प्रेरणा लेता हूं और देश के लिए गधे की तरह काम करता हूं. सवा सौ करोड़ देशवासी मेरे मालिक हैं. गधा वफादार होता है उसे जो काम दिया जाता है वह पूरा करता है. पीएम ने कहा- मैं हैरान हूं कि आपकी जातिवादी मानसिकता से कि पशु में भी ऊंच-नीच का भाव देखने लग गए. गधा आपको इतना बुरा लगने लगा. गधा भी हमें प्रेरणा देता है. वह हमेशा अपने मालिक के प्रति वफादार होता है और जिम्मेदारियों को निभाता है. जिनके गले लगकर आप वोट मांग रहे हो उसी यूपीए सरकार ने 2013 में गुजरात के गधों का पोस्टल स्टैंप निकाला था.

नेताओं का ऐसे शब्‍दों का इस्‍तेमाल करना हमें पलभर तो हंसा देता है, मगर फिर सोचने के लिए मजबूर करता है, क्‍या नेताओं की ये भाषा-शैली हमारे देश के लिए ठीक है?

देश के जाने- माने कवि और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्‍वास ने हिन्दी के आचार्य हास्य कवि स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक कविता को आज के चुनावी माहौल के अनुसार प्रसांगिक बताते हुए इस कविता का पाठ करते हुए यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया है, इस कविता का शीर्षक है, ‘इधर भी गधे हैं उधर भी गधे हैं’

आप भी सुनिए ये कविता, ‘इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं'. 

 

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