अब दिल्ली में होगा तमिलनाडु की सत्ता का फैसला , राज्यपाल ने भेजी रिपोर्ट

तमिलनाडु की सत्ता की बागडोर किसके हाथो में जाएगी अब इसका फैसला दिल्ली में होगा. राज्यपाल सी.विद्यासागर राव ने अपनी रिपोर्ट केंद्र की मोदी सरकार और राष्ट्रपति को भेज दी है. तमिलनाडु में इन दिनों कुर्सी को लेकर रस्साकशी जारी है. एआईडीएमके के दोनों खेमों ने गुरुवार शाम को राज्यपाल सी. विद्यासागर राव से मुलाकात कर अपना-अपना पक्ष रख दिया है. अब इंतज़ार है तो राज्यपाल के फैसले का. गुरुवार को एआईडीएमके की महासचिव शशिकला ने 10 मंत्रियों के साथ राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने को लेकर अपना दावा पेश किया. शशिकला ने राज्यपाल को 129 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी सौंपी. वहीं कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा वापस लेने की अर्जी दी है. पन्नीरसेल्वम ने दलील दी है कि पार्टी (एआईडीएमके) ने उन पर इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया था. राज्यपाल से मुलाकात के बाद पन्नीरसेल्वम ने मीडिया से कहा, अच्छा ही होगा और सत्य की जीत होगी.

राजभवन के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्यपाल ने पन्नीरसेल्वम को आश्वासन दिया है कि वह कानून के हिसाब से ही काम करेंगे. दूसरी तरफ शशिकला के करीबी एम थंबीदुरई ने कल दिल्ली में पीएम मोदी और केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर शशिकला के जल्द शपथ ग्रहण की मांग रखी. इन सब के बीच राज्यपाल ने अपने अगले कदम की भनक नहीं दी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शशिकला ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया और राज्यपाल को 129 विधायकों की लिस्ट सौंपी. राज्यपाल ने 5 दिन बाद बहुमत की बात कही है. राज्यपाल ने उन्हें बताया कि, पन्नीरसेल्वम ने 5 दिन का समय मांगा है. दरअसल, पन्नीरसेल्वम का कहना है कि शशिकला की लिस्ट में सत्य नहीं है. शशिकला ने इस पर जवाब देते हुए कहा है कि हमारे पास 134 विधायकों का समर्थन है ,लेकिन 5 विधायक टूट भी सकते हैं. लेकिन 129 विधायकों के चलते हमारा बहुमत बल पूरा है.

राज्यपाल ने जब शशिकला से पूछा कि हस्ताक्षरों को सत्यापित कौन करेगा? तो इस पर शशिकला ने कहा कि विधायकों को आधे घंटे में पेश कर सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने शशिकला को यह साफ किया कि उन्हें पन्नीरसेल्वम द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर कुछ समय चाहिए. ताजा अपडेट की बात करें तो शशिकला को सीएम बनाने के खिलाफ अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है.

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