बर्थडे स्‍पेशल: 92 के हुए अपने फैसलों पर अटल रहने वाले ‘अटल बिहारी वाजपेयी’

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के सबसे बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी का आज जन्मदिन है. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था. अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम है, जिन्होने 5 दशक तक भारतीय राजनीति में रहने के बावजूद अपने दामन को कभी उस रंग मे नही रंगा, वाजपेयी ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए 90 के दशक में बीजेपी को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई. .उन्हों ने न केवल एक बेहतरीन नेता बल्कि एक अच्छेे कवि के रूप में दुनिया में नाम कमाया और एक शानदार वक्ता के रूप में लोगों के दिल जीते.
25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ. अटल के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और मां कृष्णा देवी हैं. वाजपेयी का संसदीय अनुभव पांच दशकों से भी अधिक का विस्तार लिए हुए है. अटल जी पहली बार 1957 में संसद सदस्य चुने गए थे. साल 1950 की शुरुआत में आरएसएस की पत्रिका को चलाने के लिए वाजपेयी ने कानून की पढ़ाई बीच में छोड़ दी. बाद में उन्होंने आरएसएस में अपनी राजनीतिक जड़ें जमानी शुरु की, वाजपेयी की राजनीति में शुरुआत 1942-45 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई. उन्होंने कम्युनिस्ट के रूप में शुरुआत की, लेकिन हिंदुत्व की आवाज बुलंद करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता के लिए साम्यवाद से किनारा कर लिया.
1_atalbiharivajpayee1
अटल बिहारी वाजपेयी 1951 से ही भारतीय राजनीति में शामिल है, 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे. इसके बाद 1957 में वह सासंद बनें. वाजपेयी कुल 10 बार लोकसभा के सांसद रहें, वहीं वह दो बार 1962 और 1986 में राज्यसभा के सांसद भी रहें. इस दौरान अटल ने उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली और मध्य प्रदेश से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. वहीं वह गुजरात से राज्यसभा पहुंचे थे. 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं होने से उनकी सरकार महज 13 दिन में ही गिर गई. आंकड़ों ने एक बार फिर पलटी मारी और स्थिर बहुमत नहीं होने के कारण 13 महीने बाद 1999 की शुरुआत में उनके नेतृत्व वाली दूसरी सरकार भी गिर गई. अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता द्वारा केंद्र की बीजेपी की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने की पृष्ठभूमि में वाजपेयी सरकार धराशायी हो गई. लेकिन 1999 का चुनाव उनके लिए कामयाबी से भरा रहा, वाजपेयी पिछली बार के मुकाबले एक अधिक स्थिर गठबंधन सरकार के मुखिया बने, जिसने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. गठबंधन राजनीति में आकड़ो की मजबूरी के कारण बीजेपी को अपने मूल मुद्दों को पीछे छोड़ना पड़ा और संसद मे स्वंय इस बात को स्वीकार किया

देश हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी को उनके ‘अटल’ फैंसलों के लिए भी याद करता हैं, 1974 में पोखरण पहले परमाणु परीक्षण के बाद ,11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट कर अटल बिहारी वाजपेयी ने सभी को चौंका दिया. यह भारत का दूसरा परमाणु परीक्षण था, कई देशों के लगातार विरोध के बावजूद अटल सरकार ने इस परीक्षण को अंजाम दिया, जिसके बाद अमेरिका, कनाडा, जापान और यूरोपियन यूनियन समेत कई देशों ने भारत पर कई तरह की रोक भी लगा दी थी जिसके बावजूद अटल सरकार ने देश की जीडीपी में बढ़ोतरी की. पोखरण का परीक्षण अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे बड़े फैसलों में से एक है.
1992 मे वाजपेयी ने अनेक बीजेपी नेताओं के रुख के विपरीत स्पष्ट शब्दों में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की घटना की घोर निंदा की और धर्मनिरपेक्षता के पैमाने पर भी खरे उतरे, वाजपेयी एक जाने माने कवि भी हैं और उनके पार्टी सहयोगी अक्सर उनकी रचनाओं को उद्धृत करते हैं.

आपके बता दें कि केंद्र सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन को गुड गर्वनेंस डे के तौर पर मना रही है, 27 मार्च 2017 को अटल बिहारी वाजपेयी को ‘भारत-रत्न’ से नवाज़ा जाएगा,खुद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उनके घर जाकर उन्हें ये सम्मान भेंट करेंगें !

Photo Courtesy:eltrivate.com
Photo Courtesy:eltrivate.com

अटल जी ने अनेकों कविताएं लिखीं,उनकी एक मशहूर कविता पढ़िए:
आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने-
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *