अलविदा 2016: आइए पढ़ें उन हस्तियों के बारे में जिन्होंने 2016 में दुनिया को कहा अलविदा

नईदिल्ली: बीते वर्ष में कई जानीमानी हस्तियां हमें हमेशा के लिए अलविदा कह गईं आइए एक नजर में पढ़ते हैं, उन हस्तियों के बारे में जो अब हमारे बीच नही हैं.

एबी वर्धन
दो जनवरी को लंबी बीमारी के बाद एबी वर्धन का  निधन हो गया. उनका पूरा नाम अध्रेंदू भूषण वर्धन था. एबी वर्धन गठबंधन की राजनीति के समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ नेता थे.

मुफ्ती मोहम्मद सईद
अच्छी खासी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में भाजपा के साथ लगभग असंभव समझे जाने वाली गठबंधन सरकार बनाने का शिल्पकार माने जाने वाले जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का संक्षिप्त बीमारी के बाद 7 जनवरी को निधन हो गया. एक गूढ़ वकील से लेकर देश के अब तक के एकमात्र मुस्लिम गृहमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले सईद ने एक मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह राष्ट्रीय राजनीति मे खासतौर पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपने लिए एक अलग मुकाम बनाया था.

जे जयललिता
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का पांच दिसंबर को निधन हो गया. जे जयललिता तीन दशकों से तमिलनाडु की राजनीति का एक केन्द्र रहीं और गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने वाली लोकप्रिय नेता रही, इसी साल विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी अन्नाद्रमुक को शानदार जीत दिलाई थी.

निदा फाजली                                                                               अपनी गजलों से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले मशहूर शायर और गीतकार निदा फाजली का 78 वर्ष की उम्र में आठ फरवरी को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. निदा फाजली नाम काफी लोकप्रिय हुए इनका पूरा नाम मुकतिदा हसन निदा फाजली था. उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया, साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म श्री इनंमे से मुख्य है. फाजली को उर्दू और हिंदी में गजलों, नज्मों और दोहों को आम बोलचाल की भाषा के अलग तरह से इस्तेमाल और खूबसूरती से उन्हें पेश करने के लिए जाना जाता है.

एसएच रजा
आधुनिक भारतीय कलाकार एसएच रजा का 23 जुलाई को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वे 94 वर्ष के थे एसएच रजा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ख्याति प्राप्त कलाकार थे और उनको पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था. वह 1983 में ललित कला अकादमी के फैलो निर्वाचित हुए थे.

रवींद्र कालिया
एक सशक्त कहानीकार के रूप में पहचाने जाने वाले, हिन्दी के बड़ॆ कहानीकार एवं कई साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादक रह चुके रवींद्र कालिया का 9 जनवरी को 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनकी ‘नौ साल छोटी पत्नी’ कहानी काफी चर्चित हुई, उनकी आत्मकथा रूपी रचना ‘गालिब छूटी शराब’ भी काफी सराही गई. कालिया धर्मयुग सहित कई पत्र-पत्रिकाओं से उनका जुडाव रहा

बलराम जाखड़
तीन फरवरी को कांग्रेस के वरिष्ट नेता एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का निधन हो गया. वह 92 वर्ष के थे. जाखड़ 1980 से लेकर 1989 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे. इस दौरान उन्होंने संसद संग्रहालय की स्थापना में योगदान दिया.

सुधीर तैलंग                                                                                6 फरवरी को 55 साल की उम्र में भारतीय राजनीति को हास्य-व्यंग्य के साथ खूबसूरती से कागज पर चित्रित करने वाले जानेमाने कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का निधन हो गया.सुधीर तैलंग द इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, द टाइम्स ऑफ इंडिया समेत कई अखबारों में काम कर चुके थे, तैलंग को 2004 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया था. कार्टूनिस्ट के तौर पर उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, पी वी नरसिंहराव, मनमोहन सिंह और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राजनेताओं पर व्यंग्य-चित्र बनाए,जो काफी लोकप्रिय हुए.

पीए संगमा
पूर्वोत्तर से लोकसभा के पहले अध्यक्ष रहे पीए संगमा का चार मार्च को निधन हो गया. संगमा राजनीति में ऐसे कद के नेता माने जाते थे, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल को चुनौती दी थी.

महाश्वेता देवी
प्रख्यात लेखिका और समाज के दबे कुचले और वंचित वर्गों के लिए काम करने वाली महाश्वेता देवी का 28 जुलाई को निधन हो गया. वह 91 वर्ष की थीं. साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कारों से सम्मानित महाश्वेता देवी ने आदिवासियों और ग्रामीण क्षेत्र के वंचितों के कल्याण के लिए अथक प्रयास और कार्य किए थे.

फिदेल कास्त्रो
क्यूबा जैसे छोटे से देश को शक्तिशाली पूंजीवादी अमेरिका के पैर का कांटा बनाने वाले क्रांतिकारी एवं कम्युनिस्ट नेता फिदेल कास्त्रो का 26 नवंबर को निधन हो गया. जैतून के रंग की वर्दी, बेतरतीब दाढ़ी और सिगार पीने अपने अलग अंदाज के लिए मशहूर फिदेल ने अपने देश में पैदा होने वाले असहमति के सुरों पर कड़ा शिकंजा बनाए रखा और वाशिंगटन की मर्जी के खिलाफ चलकर वैश्विक स्तर पर अपनी एक नई पहचान बनाई.

अनुपम मिश्र                                                                                 प्रख्यात पर्यावरणविद् और जल संरक्षणवादी अनुपम मिश्र ने भी साल 2016 में इस संसार को अलविदा कह दिया.अनुपम मिश्र एक जीवंत शक्सियत हैं, वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने देश में पर्यावरण पर काम करना शुरू किया था और वो भी उस समय जब सरकार में पर्यावरण का कोई विभाग तक नहीं था. उन्होंने गांधी शांति प्रतिष्ठान में पर्यावरण कक्ष की स्थापना भी की. अनुपम मिश्र, जयप्रकाश नारायण के साथ दस्यु उन्मूलन आंदोलन में भी सक्रिय रहे.

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