केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार का बयान हमने नहीं कहा कि हम 100 फीसदी कैशलेस होगे

नई दिल्ली: कैशलेश लेनदेन को भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए वित्त राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा है कि हमने कभी भी सौ प्रतिशत कैशलेश की बात नहीं कही है लेकिन अगर 15-20 प्रतिशत लोग भी कैशलेस लेनदेन की ओर कदम बढ़ाते हैं तो यह एक बड़ी कामयाबी होगी क्योंकि यह पारदर्शी और कारगर कदम है.

नोटबंदी की घोषणा को एक हुए एक महीने से अधिक समय गुजर चुका हैं उसके के बाद भी बैंकों और एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनों के बारे में जब उनसे पूछा गया तो मंत्री महोदय ने कहा कि यह बात सही है कि 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मुद्रा थी, जिसको वापस लिया जा रहा है असुविधा होना स्वाभिक हैं, पेंशनधारक,अस्पतालों, बुजुर्गों, महिलाओं को बैंकों में होने वाली परेशानियों के बारे में पूछे जाने पर उनका जवाब था कि प्रधानमंत्री ने पहले ही 50 दिन के कष्ट की बात कही है. अभी बैंकों की कुछ शिकायतें लगातार आ रही है उस पर हमने ध्यान दिया है और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं.

इसके अलावा हमने अस्पतालों एवं अन्य लोगों से भी सम्पर्क किया और लोगों की परेशानियां धीरे धीरे कम हो रही हैं. पुराने नोट बदलने की प्रक्रिया में अब आम जनता नहीं आ रही हैं.

संतोष गंगवार ने कहा कि बैंको की लाइनें धीरे-धीरे लाइनें कम हो रही हैं. अभी महीने के दो ही हफ्ते गुजरे हैं. पहले हफ्ते में सभी को तनख्वाह मिलनी थी इसी कारण लोगों की भीड़ बढ़ी,लोगों को लगातार तनख्वाह मिल रही है भले ही कम लोगों को मिल पा रही हो लेकिन सभी बैंकों में पैसा जा रहा है. लोगों को असुविधा हो रही हैं, हम मान सकते हैं लेकिन जल्द इसका समाधान निकालने का प्रयास भी जारी हैं

बैंकों के स्टिंग ऑपरेशन के बारे में पूछे जाने पर गंगवार ने कहा कि वे इस बारे में जानकारी नहीं दे सकते लेकिन जो शिकायतें मिल रही हैं उन पर कारवाई की जा रही है. आरएसएस के चिंतक गुरुमूर्ति के 2000 का नोट बंद करने और कुछ आर्थिक जगत के विशेषज्ञों द्वारा नोटबंदी के बाद विकास दर कम होने की भविष्यवाणी के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये उनके अपने विचार हो सकते हैं हम केवल सरकार का पक्ष रख सकते हैं और सरकार का फैसला भ्रष्टाचार और कालेधन को समाप्त करना और वृहद आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है.

संसद के शीतकालीन सत्र में कोई कामकाज नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि सदन में कामकाज सुचारू रूप से चले यह सरकार और विपक्ष दोनों की साझी जिम्मेदारी है, इसलिए सरकार पहले दिन से नोटबंदी पर चर्चा करने को तैयार थी. लेकिन कुछ विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस ने बेतुकी शर्ते रख दीं.

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष सदन में चर्चा करने की बजाए शोर शराबा करता रहा. इससे पहले भी ऐसे कई अवसर आए हैं कि सदन नहीं

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