मूवी रिव्यू : सस्पेंन्स से भरी है ‘कहानी-2’ की कहानी

'कहानी 2' जिसके निर्देशक हैं सुजॉय घोष और 'कहानी 2' फ़्रैंचायज़ है 2012 मैं रिलीज़ हुई फ़िल्म 'कहानी' का, जो लोग इसे सीक्वल समझ रहे हैं उन्हें बता दूं की ये कहानी का सीक्वल नहीं है,ये एक अलग कहानी है और सिर्फ़ ब्राण्ड 'कहानी', यानी नाम का इस्तेमाल किया गया है. इस फिल्‍म में भी मुख्य किरदार निभा रही हैं विद्या बालन और यहां उनके साथ जुड़ रहे हैं जुगल हंसराज,अर्जुन रामपाल,मानिनी चड्ढा, नाइशा खन्ना,खराज मुखर्जी, टोटा रॉय चौधरी ! अब सबसे बड़ी मुश्किल की 'कहानी 2' की कहनी कैसे बताई जाए क्योंकि सस्पेन्स फ़िल्म के बारे में कुछ भी अगर हमने आपको बताया तो  मज़ा किरकिरा होने का डर रहता है, दुर्गा रानी सिंह यानी विद्या की बेटी की जान ख़तरे में है और वो हर हाल में उसकी जान बचाना चाहती है, और उसकी इस जंग में उसे बहुत सी मुश्किलों का  सामना करना पड़ता है

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अब बात ख़ूबियों और ख़ामियों की जिनमें सबसे पहले ख़ामी, तो पहली बात ये की अगर आप इसकी तुलना कहानी से करने बैठ गए तो शायद आपको इसका सस्पेन्स उतना ज़बरदस्त न लगे जितना कहानी का था. दूसरी बात जैसे जैसे फ़िल्म आगे बढ़ती है आपको उसकी स्क्रिप्ट का एहसास होने लगता है,की आगे क्या होगा और कौन षड्यंत्र में शामिल है, इसके अलावा कुछ सीक्वेंस लंबी हो जाती हैं मसलन अर्जुन का चेज़िंग सीन। तपन बासु की सिनेमेटोग्राफ़ी फ़िल्म का मूड, कोलकाता के कई अनदेखे पहलुओं को बख़ूबी दर्शाती है यानी बेहतरीन सिनेमेटोग्राफ़ी का बेजोड प्रयोग है, साथ ही बैकग्राउंड स्कोर भी काबिले तारिफ है, इसके अलावा अभिनय के मामले में विद्या ने फिर एक बार बेजोड अभिनय करके दिखाया है , अर्जुन रामपाल ने, जिनका अभिनय बेहद सधा हुआ है.

 

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